Sunday, May 3, 2009

तू मुझको याद रखना,मेरी बात याद रखना

तू मुझको याद रखना,मेरी बात याद रखना।
गुजरे जो खूबसूरत , लम्हात याद रखना।


बादल बरसने वाले ,आँखों में जब भी छाए;
मेरे साथ भींगने की,बरसात याद रखना।


तुमसे जुदा हो जाऊं,मैं कब ये चाहता था;
काबू में नहीं होते ,हालात याद रखना।


ग़मगीन तुम न होना,कभी इन जुदाइयों से;
मैं हूँ तुम्हारे दिल में तेरे साथ याद रखना।


नहीं आ सकूंगा मैं तो,तेरे पास ग़म न करना,
तू अपने मुहब्बत की, सौगात याद रखना।


मेंहदी लगी न तुझको,सेहरा न मैंने बाँधा;
तो क्या हुआ यादों की,बारात याद रखना।

24 comments:

  1. तुमसे जुदा हो जाऊं,मैं कब ये चाहता था;
    काबू में नहीं होते ,हालात याद रखना।
    ... behad khoobasoorat !!!!!

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  2. तुमसे जुदा हो जाऊं,मैं कब ये चाहता था;
    काबू में नहीं होते ,हालात याद रखना।
    बहुत खूब कहा है आपने....वाह.
    नीरज

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  3. har sher lazvaab ,arthpoorn..kisi ek ke liye kahna baaki ke saath nainshafee hogi..

    Umda ghazal !!

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  4. bat mehdi tak kyon le aaye, kitna achchha to chal raha tha?

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  5. दिलखुश गजल है आपकी यह बात याद रखना।

    -----------
    SBAI TSALIIM

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  6. बहुत आसान शब्दों में बड़ी सुन्दर तरीके से दिल की बात कही है | हाँ मुझे भी यही लगा कि आख़िरी शेर कुछ ज्यादा ही बात बयाँ कर रहा है , फिर तो उदासी के समन्दर में गोते लग जाते हैं |

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  7. प्यार का इज़्हार ना होगा हमसे,
    कुछ ऐसी मजबूरी हैं........

    मेरी आंखों से कुछ तो समझो,
    उन्हें कहना क्या ज़रूरी है.....

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  8. तुमसे जुदा हो जाऊं,मैं कब ये चाहता था;
    काबू में नहीं होते ,हालात याद रखना।

    halaat ki majburiyon ka b.khoobi
    bakhaan karta hua achha sher...
    sari gzl padh kar achha lagaa.
    badhaaee .
    ---MUFLIS---

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  9. बहुत लाजवाब. शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  10. achchaa likhten ji aap...aabhaar

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  11. बहुत बढ़िया ...हर शेर माशाअल्लाह...
    जमाए रहिए महफिल....

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  12. in reply to your query-

    Hi!

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    All the best.

    Manoshi

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  13. प्रसन्न जी ,
    आपकी गज़लें पढ़ कर मन खुश हो गया .
    बहुत सरल शब्दों में अच्छी अभिव्यक्ति ...बधाई
    हेमंत कुमार

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  14. लम्हात ,बरसात ,हालात,सौगात ,बारात अच्छी शब्दों का चयन /जुदाई वाली बात पर एक पुराना गाना याद आगया ,'मै अगर बिछड़ भी जाऊं ....कभी आँख नम न करना ....मेरा साया तुम्हारे साथ रहेगा /अच्छी रचना

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  15. तुमसे जुदा हो जाऊं,मैं कब ये चाहता था;
    काबू में नहीं होते ,हालात याद रखना।

    सुन्दर ग़ज़ल का पसंदीदा शेर.

    आभार.

    चन्द्र मोहन गुप्त

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  16. मेंहदी लगी न तुझको,सेहरा न मैंने बाँधा;
    तो क्या हुआ यादों की,बारात याद रखना।

    sundar ,
    ati sundar

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  17. ..."barsaat yaad rakhna"...Mai stabdh hun, is rachnako padhke...

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